दमिश्क/वाशिंगटन: करीब 12 साल की लंबी उपस्थिति के बाद अमेरिकी सेना ने आखिरकार सीरिया से अपनी वापसी पूरी कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक जॉर्डन लौट रहे हैं, जिससे पश्चिम एशियाई राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हो गया है। इस कदम से सीरियाई सरकार ने तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसने घोषणा की है कि अब देश में केवल एक ही वैध प्रशासन चलेगा। यह घोषणा सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर जोर देने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है, जो दशकों से बाहरी हस्तक्षेपों से जूझ रहा है।
सीरिया में अमेरिकी उपस्थिति का इतिहास
अमेरिकी सेना की सीरिया में तैनाती मुख्य रूप से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ लड़ाई के लिए की गई थी। 2014 में ISIS के उदय के बाद, अमेरिका ने ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ के तहत सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) जैसे स्थानीय सहयोगियों का समर्थन करना शुरू किया था। इन वर्षों में, अमेरिकी सैनिकों ने ISIS के गढ़ों को तोड़ने और आतंकवाद विरोधी अभियानों को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, उनकी उपस्थिति को हमेशा सीरियाई सरकार और उसके सहयोगियों, विशेष रूप से रूस और ईरान द्वारा ‘अवैध’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ बताया जाता रहा है।
वापसी और उसके रणनीतिक मायने
अमेरिकी सेना की वापसी को क्षेत्र में वाशिंगटन की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सैनिकों का जॉर्डन लौटना दर्शाता है कि अमेरिका अपनी आतंकवाद विरोधी रणनीति को पुनर्गठित कर रहा है, संभवतः क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ साझेदारी में दूरस्थ अभियानों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस वापसी से सीरिया के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में एक बड़ा सत्ता का खालीपन पैदा हो सकता है, जहां SDF का दबदबा था और उन्हें अमेरिकी समर्थन प्राप्त था। तुर्की, जो लंबे समय से SDF को एक आतंकवादी संगठन मानता रहा है, इस स्थिति का लाभ उठाने का प्रयास कर सकता है।
सीरियाई सरकार का यह बयान कि “अब देश में एक ही प्रशासन चलेगा” स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के प्रभुत्व को दर्शाता है। यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्र में अन्य प्रमुख शक्तियों, जैसे तुर्की और रूस, को यह संदेश देने का प्रयास है कि दमिश्क अब अपनी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह वापसी सीरिया के भविष्य को कैसे आकार देती है, खासकर ISIS के पुनरुत्थान की संभावना और सीरियाई गृहयुद्ध के बचे हुए मुद्दों के समाधान के संदर्भ में।
अमेरिकी वापसी के साथ, सीरिया एक नए और अनिश्चित दौर में प्रवेश कर रहा है। क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय संकट और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव पर वैश्विक समुदाय की गहरी नजर रहेगी।
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