कैलिफोर्निया में H-1B वीज़ा धोखाधड़ी का सनसनीखेज खुलासा
संयुक्त राज्य अमेरिका में H-1B वीज़ा कार्यक्रम के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। कैलिफोर्निया में भारतीय मूल के दो व्यक्तियों ने H-1B वीज़ा धोखाधड़ी से जुड़े अपने अपराधों को स्वीकार कर लिया है। प्रदीप कुमार (45) और अदिति गुप्ता (42) नामक इन आरोपियों ने संघीय अदालत में कबूल किया कि उन्होंने अप्रवासी श्रमिकों को अमेरिका लाने के लिए फर्जी कंपनियों और गैर-मौजूद नौकरियों का एक जटिल जाल बिछाया था। इस धोखाधड़ी ने न केवल अमेरिकी आव्रजन कानूनों का उल्लंघन किया, बल्कि कई विदेशी श्रमिकों के भविष्य को भी खतरे में डाल दिया।
कैसे अंजाम दिया गया H-1B धोखाधड़ी का यह गोरखधंधा?
जांच अधिकारियों के अनुसार, प्रदीप कुमार और अदिति गुप्ता ने 2017 से एक सुनियोजित तरीके से इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। उन्होंने ‘ग्लोबल टेक सॉल्यूशंस’ और ‘इनोवेटिव कनेक्ट इंक’ जैसी कई शैल कंपनियां बनाईं, जिनका वास्तव में कोई परिचालन नहीं था। इन कंपनियों के माध्यम से, उन्होंने विशेष रूप से भारत से H-1B वीज़ा आवेदकों को आकर्षित किया। उन्हें सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट और आईटी कंसल्टेंट जैसे उच्च-कुशल पदों का लालच दिया जाता था, जो दरअसल अस्तित्व में ही नहीं थे।
अभियुक्तों ने H-1B वीज़ा के लिए आवेदन करते समय अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (USCIS) को झूठे दस्तावेज और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की। इसमें फर्जी क्लाइंट लेटर, नौकरी की झूठी पेशकशें और रोजगार सत्यापन शामिल थे। एक बार जब वीज़ा स्वीकृत हो जाते थे, तो लाभार्थी या तो बिना किसी वास्तविक काम के “बेंच” पर बैठे रहते थे, या उनसे उनकी वास्तविक कमाई का एक बड़ा हिस्सा वापस देने के लिए कहा जाता था। कई मामलों में, इन श्रमिकों को ऐसे ग्राहकों के लिए काम करने के लिए मजबूर किया जाता था जिनका उनकी प्रायोजक कंपनी से कोई संबंध नहीं था, या उन्हें अपनी योग्यता से काफी कम वेतन पर काम करना पड़ता था। इस पूरे खेल में, प्रदीप और अदिति ने लाखों डॉलर की कमाई की।
कानूनी शिकंजा और स्वीकारोक्ति
यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स (HSI) और यूएस अटॉर्नी कार्यालय ने एक संयुक्त जांच शुरू की। वित्तीय लेन-देन, गवाहों के बयानों और इलेक्ट्रॉनिक संचार के गहन विश्लेषण के बाद, जांचकर्ताओं ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया। प्रदीप कुमार और अदिति गुप्ता को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। लंबी पूछताछ और सबूतों के सामने, दोनों ने इस महीने की शुरुआत में कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में H-1B वीज़ा धोखाधड़ी और वायर धोखाधड़ी की साजिश रचने का अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
अपने अपराधों को स्वीकार करने के बाद, दोनों अब गंभीर कानूनी परिणामों का सामना कर रहे हैं। वायर धोखाधड़ी की साजिश के लिए अधिकतम 20 साल की कैद और H-1B वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश के लिए 5 साल की कैद हो सकती है, साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। उनकी सजा की सुनवाई 15 जुलाई, 2024 को होनी तय है। अभियोजन पक्ष ने जोर देकर कहा है कि ऐसे अपराध न केवल अमेरिकी श्रम बाजार को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वैध आव्रजन प्रणाली की अखंडता को भी कमजोर करते हैं। यह मामला उन सभी के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो धोखाधड़ी के माध्यम से लाभ कमाने की कोशिश करते हैं।
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